उजनी डैम पर बनेगा भारत का सबसे बड़ा ग्रीन एआई हब
उजनी डैम पर बनेगा भारत का सबसे बड़ा ग्रीन एआई हब
2,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, 1,400 मेगावाट डेटा सेंटर
Posted by Niilesh waghela
मुंबई: जेडब्ल्यू ग्लोबल कंपनी ने महाराष्ट्र के उजनी डैम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना का विस्तृत प्लान प्रस्तुत किया है। यह योजना कंपनी की ‘द सीड – सस्टेनेबल इको-एंटरप्राइज डिस्ट्रिक्ट’ अवधारणा के तहत पहली परियोजना होगी। इसका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढांचे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी को एक साथ जोड़कर सतत जिला विकास का नया मॉडल तैयार करना है।
इस परियोजना के तीन प्रमुख घटक होंगे। पहला, उजनी जलाशय के लगभग 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 2,000 मेगावाट क्षमता की तैरती सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जाएगी। दूसरा, 1,800 मेगावाट क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) होगी, जिसमें दिन में बनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित कर रात में उपयोग किया जाएगा। तीसरा, 1,400 मेगावाट क्षमता वाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) डेटा सेंटर होगा, जिसकी बिजली की जरूरत पूरी तरह सौर ऊर्जा से पूरी की जाएगी।
इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में 500 मेगावाट क्षमता विकसित की जाएगी, जबकि 2031 तक डेटा सेंटर की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। परियोजना का क्रियान्वयन आवश्यक वैधानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय अनुमतियां मिलने के बाद होगा।
जेडब्ल्यू ग्रुप के डायरेक्टर - ऑपरेशंस संजय वाजे ने कहा, “उजनी परियोजना भारत के डिजिटल विकास के अगले चरण को गति देने के लिए एकीकृत बुनियादी ढांचा विकसित करने की हमारी सोच को दर्शाती है। अक्षय ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और एआई कंप्यूटिंग को एक साथ लाकर हम ऐसा दीर्घकालिक मॉडल बना रहे हैं, जिसमें तकनीकी प्रगति के साथ संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग भी सुनिश्चित हो। हमारा ध्यान पर्यावरण संरक्षण, पानी और ऊर्जा के कुशल उपयोग और स्थानीय समुदायों के हितों पर रहेगा।”
परियोजना में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए प्रतिवर्ष अधिकतम 0.50 टीएमसी पानी की आवश्यकता का अनुमान है। डेटा सेंटर में पानी की खपत कम रखने के लिए क्लोज्ड-लूप डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग तकनीक और ड्राई कूलर का उपयोग होगा। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था के तहत जलाशय में कोई अपशिष्ट जल नहीं छोड़ा जाएगा। तैरती सौर परियोजना के बावजूद जलाशय का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा खुला रहेगा।
इस परियोजना से लगभग 2,800 स्थायी और करीब 40,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। डेटा सेंटर संचालन, आईटी, साइबर सुरक्षा, सौर ऊर्जा संचालन, बैटरी प्रबंधन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में रोजगार मिलेगा। कंपनी स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाएगी।
जेडब्ल्यू ग्रुप के ग्लोबल डायरेक्टर मार्क बेली ने कहा, “दुनिया में एआई कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत के पास विश्वस्तरीय डिजिटल सुविधाओं को टिकाऊ ऊर्जा के साथ जोड़ने का बड़ा अवसर है। ‘द सीड’ इसी समन्वय पर आधारित है।” कंपनी ने भीमानगर में स्वास्थ्य, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़ी पहलें भी प्रस्तावित की हैं।

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