एनसीपीए और टीमवर्क आर्ट्स मशहूर नाटक लेकर मुंबई आ रहे हैं

चार नाटक, एक मंच : एनसीपीए और टीमवर्क आर्ट्स की मुंबई को भेंट

पूरे भारत से चुने गए चार ख़ास नाटक 12 से 15 नवंबर, 2026 तक मुंबई में एनसीपीए के एक्सपेरिमेंटल थिएटर में मंच पर दिखाए जाएँगे


Posted by Niilesh waghela 

मुंबई: मुंबई स्थित भारत के प्रमुख कला और संस्कृति केंद्र, नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स, एनसीपीए ने भारत की अग्रणी कला और क्यूरेटोरियल कंपनी, टीमवर्क आर्ट्स के साथ मिलकर भारतीय रंगमंच के चार दिनों की ख़ास प्रस्तुति के लिए भारत के चार बेहतरीन नाटकों को एक साथ लाने का फ़ैसला किया है। अलग-अलग रंग परंपराओं, भाषाओं और प्रदर्शन शैलियों को समेटे हुए यह आयोजन उन कई तरीक़ों की झलक पेश करता है जिनसे भारतीय कहानियाँ मंच पर अपनी अभिव्यक्ति पाती हैं।
मुंबई में एनसीपीए के एक्सपेरिमेंटल थिएटर में 12 से 15 नवंबर, 2026 तक होने वाला यह शोकेस दर्शकों को रंगमंच की अलग-अलग दुनिया की यात्रा पर ले जाएगा, जिसमें पारंपरिक प्रदर्शन शैलियों से लेकर समकालीन, एक्सपेरिमेंटल थिएटर तक शामिल होंगे और साथ ही कई भारतीय भाषाओं और बिना शब्दों वाली कहानी कहने की कला भी देखने को मिलेगी। ये चारों नाटक रोज़ शाम 7 बजे दिखाए जाएँगे।
महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवॉर्ड्स, मेटा के 2023, 2025 और 2026 संस्करणों में दिखाए गए नाटकों में से चुने गए ये चार नाटक एक ख़ासतौर पर तैयार की गई प्रस्तुति के तौर पर मुंबई लाए जा रहे हैं। इससे दर्शकों को भारतीय रंगमंच की व्यापकता और समृद्ध क्षेत्रीय विविधता को अनुभव करने का मौक़ा मिलेगा। इस फ़ेस्टिवल में मलयालम, बांग्ला, बुंदेली और हिंदी जैसी विभिन्न भाषाओं के नाटक शामिल हैं, जो उन अलग-अलग तरीक़ों को दर्शाते हैं जिनसे कलाकार इतिहास, पौराणिक कथाओं, साहित्य, समाज और मानवीय अनुभवों से जुड़ते हैं।
आयोजन में शामिल चार नाटक इस प्रकार हैं:
1) द ओल्ड मैन एंड द सी : कथकली ऑफ द मॉरो, मेटा 2026 (META 2026)
मलयालम (मणिप्रवालम) | 80 मिनट
12 नवंबर, 2026 | शाम 7 बजे
निर्देशन : नीरज जी.एम.
कला और संस्कृति के लिए 'डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी', केरल कलामंडलम द्वारा निर्मित यह नाटक, आधुनिक थिएटर की नाटकीय और तकनीकी शब्दावली को पारंपरिक कथकली के मूल सिद्धांतों के साथ जोड़ने की संभावनाओं को तलाशता है।

2) निहसंगो ईश्वर, मेटा 2025 (META 2025)
बांग्ला | 90 मिनट
13 नवंबर, 2026 | शाम 7 बजे
निर्देशन : सुमन साहा
बंगाल रिपर्टरी द्वारा निर्मित यह नाटक कृष्ण की दैवीय पहचान और उनकी मानवीय इच्छाओं के बीच के तनाव को दर्शाता है, जिसमें वे अपने अस्तित्व के अर्थ और अपनी नियति की अनिवार्यता पर सवाल उठाते हैं। आत्म-मंथन की इस यात्रा में देवता जैसी निर्दोष छवि के पीछे से एक बेहद अकेला और संवेदनशील इंसान उभरकर सामने आता है।

3 ) द डिपार्टेड डॉन, मेटा 2023 (META 2023)
बिना संवाद वाला, नॉन-वर्बल (Non-verbal) | 60 मिनट
14 नवंबर, 2026 | शाम 7 बजे
अखोका थिएटर और सेरेंडिपिटी आर्ट्स द्वारा निर्मित यह नाटक एक ऐसी जगह की तलाश की यात्रा से शुरू होता है जिसे 'घर' कहा जा सके और धीरे-धीरे अनिश्चितता और कठिनाइयों के बीच जीवन के संघर्ष को दर्शाता है।

4) स्वांग : जस की तस, मेटा 2025 (META 2025)
बुंदेली और हिंदी | 90 मिनट
15 नवंबर, 2026 | शाम 7 बजे
निर्देशन: अक्षय सिंह ठाकुर

रंगभरण थिएटर, जबलपुर (मध्य प्रदेश) द्वारा निर्मित यह नाटक एक हास्यपूर्ण, संगीतमय और तीखे व्यंग्य वाली प्रस्तुति है। 'स्वांग: जस की तस' विजयदान देथा की रचना 'ठाकुर का रूठना' पर आधारित है और स्वांग की समृद्ध लोक-नाट्य परंपरा का जश्न मनाता है, जिसमें गीत, नृत्य और अभिनय के माध्यम से कहानियों को जीवंत किया जाता है। 

टीमवर्क आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय के. रॉय ने कहा, "भारतीय थिएटर मौलिक कहानियों, भाषाओं, परंपराओं और रंगमंच से जुड़ी विभिन्न शैलियों का एक शानदार मिश्रण है। मेटा अवॉर्ड्स जीतने वाले ये चार प्रोडक्शन देश भर में रंगमंच को आकार देने वाली अलग-अलग आवाज़ों और तरीकों को दिखाते हैं, चाहे वह लेखन हो, परफॉर्मेंस हो, डिज़ाइन हो या कलारूप हो। हमें एनसीपीए के साथ मिलकर इन नाटकों को मुंबई लाने और दर्शकों को आज के भारतीय रंगमंच की अद्भुत विविधता की झलक दिखाने में ख़ुशी हो रही है।"

एनसीपीए में थिएटर और फ़िल्मों के हेड ब्रूस गुथरी ने कहा, "हमें ख़ुशी है कि 2026 में 'महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवॉर्ड्स', मेटा की नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स, एनसीपीए में वापसी हो रही है; हमने यहीं एनसीपीए में, मेटा के 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया था। इस साल हम महाराष्ट्र के बाहर तैयार और परफॉर्म किए चार बेहतरीन नाटक मुंबई ला रहे हैं, जिनका महाराष्ट्र में प्रीमियर होगा। सबटाइटल की मदद से यह प्रोग्राम ज़्यादा से ज़्यादा दर्शकों तक पहुँच पाएगा, जबकि वर्कशॉप तथा बातचीत से परफॉर्मेंस और बेहतर होगी और लोगों को काम एवं कलाकारों से क़रीब से जुड़ने का मौक़ा मिलेगा। यह चार दिन का थिएटर फ़ेस्टिवल है जिसे आप मिस नहीं करना चाहेंगे।"

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