Smriti Mandhana ने युवा महिलाओ को सिखाए पीरियड्स हाइजीन के गुर
Pee Safe की नई मुहिम 'Play in Comfort': स्मृति मंधाना ने युवा महिलाओ को सिखाए पीरियड्स हाइजीन के गुर
Posted by Niilesh waghela
मुंबई : भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने मुंबई के मैनादेवी बजाज इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 'प्ले इन कम्फर्ट' (Play in Comfort) मुहिम में हिस्सा लिया। इस खास कार्यक्रम को 'पी सेफ' (Pee Safe) द्वारा आयोजित किया गया, जिसका मकसद युवा महिला खिलाड़ियों और स्कूल स्टूडेंट्स के बीच ओवरऑल हेल्थ, कॉन्फिडेंस और पीरियड्स हाइजीन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस इवेंट में कई महिला क्रिकेटर्स और स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम के दौरान स्मृति मंधाना ने सभी लड़कियों से खुलकर बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने छात्राओं को मोटिवेट करते हुए कहा कि वे बिना किसी झिझक या परेशानी के, पूरी सहजता और कॉन्फिडेंस के साथ खेलों में आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें।
इस पूरे प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य यह था कि लड़कियां बिना किसी झिझक या संकोच के खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सकें। प्रोग्राम में पीरियड्स से जुड़ी सेहत, सेल्फ केयर और इस बात पर भी खास चर्चा हुई कि स्कूलों और खेल के मैदानों को लड़कियों के लिए कितना सुरक्षित और मददगार होना चाहिए, ताकि उन्हें वहां किसी भी तरह की असहजता महसूस न हो।
इस इवेंट के जरिए स्टूडेंट्स, एजुकेटर्स और स्पोर्ट्स लवर्स ने एक साथ आकर खुलकर बात करने की शुरुआत की, ताकि खेल की दुनिया में पीरियड्स को लेकर आज भी जो हिचकिचाहट या रूढ़िवादी सोच बनी हुई है, उसे पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
इस प्रोग्राम के दौरान स्मृति मंधाना ने युवा छात्राओं और खिलाड़ियों को सम्मानित किया, और मैदान पर उनके साथ क्रिकेट खेलकर उनका हौसला बढ़ाया। इस बातचीत और खेल का मुख्य मकसद युवा लड़कियों को इंस्पायर करना था, ताकि वे पूरे कॉन्फिडेंस, लगातार मेहनत और एक अच्छे सपोर्ट सिस्टम (जैसे परिवार और दोस्तों के साथ) के दम पर खेल की दुनिया में आगे बढ़ सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वाइस कैप्टन स्मृति मंधाना ने युवा छात्राओं से बातचीत करते हुए एक बहुत ही खूबसूरत और प्रेरणादायक बात कही। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए खेलती हैं और यही सोच उन्हें हमेशा आगे बढ़ने का हौसला देती है। जब आप अपने देश या अपनी किसी भी टीम की जर्सी पहनते हैं, तो आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होती है कि आप अपनी भूमिका के साथ पूरा इंसाफ करें।
स्मृति ने इस बात पर जोर दिया कि खेल के मैदान पर सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं होता, बल्कि उसके पीछे लाखों लोगों का प्यार और सपोर्ट होता है, जो आपकी जिम्मेदारी को और भी बड़ा बना देता है। यही वजह है कि जब देश और जिम्मेदारी का जज्बा इतना बड़ा हो, तो पीरियड्स का दर्द भी आपके रास्ते में रुकावट नहीं बन पाता और आप उसे भूलकर आगे बढ़ जाते हैं।
इस मौके पर 'पी सेफ' (Pee Safe) के को-फाउंडर रिथीश कुमार ने कहा कि युवा लड़कियों को अक्सर खेल-कूद और अपनी सेहत, खासकर पीरियड्स के दिनों को संभालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने "प्ले इन कम्फर्ट" (Play in Comfort) मुहिम की शुरुआत की है, जिसका मकसद लड़कियों के बीच इस विषय पर जागरूकता बढ़ाना और खुलकर बात करना है।
वे चाहते हैं कि हर युवा खिलाड़ी की जिंदगी में कंफर्ट और हाइजीन एक जरूरी हिस्सा बने, ताकि पीरियड्स के दौरान भी लड़कियां एक्टिव रह सकें, उनका कॉन्फिडेंस बना रहे और वे बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को पूरा करने पर फोकस कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने उन आम समस्याओं और चिंताओं पर भी बात की, जिनका सामना अक्सर युवा खिलाड़ी पीरियड्स के दिनों में करती हैं।


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