अमरीका के हार्वर्ड में लहराया मराठी उद्यमी का झंडा

अमरीका के हार्वर्ड में लहराया मराठी उद्यमी का झंडा

Posted by Niilesh waghela 

मुंबई: महाराष्ट्र के उद्यमी और ‘एल्युमिनियम मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचाने जाने वाले भरत गीते तथा उनकी कंपनी ‘तौराल इंडिया’ की प्रेरक सफलता गाथा अब विश्व की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था अमेरिका की हार्वर्ड बिझनेस स्कुल के केस स्टडी के रूप में पढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही ‘तौराल इंडिया’ वैश्विक स्तर पर अध्ययन की जाने वाली चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है।

यह केस स्टडी तौराल इंडिया के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भरत गीते के नेतृत्व में विकसित हाई-प्रिसिजन एल्युमिनियम कास्टिंग व्यवसाय के सफर पर आधारित है। वर्ष 2016 में जर्मनी की कंपनी थोनी अलुटेक के साथ संयुक्त उपक्रम से शुरू हुए इस उद्यम ने ऊर्जा, रेलवे, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म के रूप में उभर चुकी है।

इस केस स्टडी को हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के वरिष्ठ प्राध्यापक व्ही. जी. नारायणन ने तैयार किया है। मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इसका औपचारिक प्रस्तुतीकरण किया। इस अवसर पर भरत गीते, पूर्व उद्योग मंत्री सुभाष देसाई सहित उद्योग, शिक्षा और नीति क्षेत्र के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

प्रो. नारायणन ने कहा कि तौराल इंडिया का सफर उभरते बाजारों में उत्पादन क्षमता निर्माण के महत्वपूर्ण तत्वों को दर्शाता है। वैश्विक सहयोग, उन्नत तकनीक और स्थानीय क्रियान्वयन के संयोजन से विश्वस्तरीय उद्योग कैसे खड़ा किया जा सकता है, इसका यह उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केस स्टडी नई पीढ़ी के उद्यमियों को प्रेरित करेगी।

कम समय में अपनी दूरदृष्टि से गीते ने कंपनी को एक अलग पहचान दी. इस यात्रा में उनका उद्देश्य मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे संकल्पनाओं को साकार करने का रहा है. यह केस स्टडी अगर किसी एक युवा को भी उद्योग करने के लिए प्रेरित करे, तो मेरा इस केस स्टडी को तैयार करने का उद्देश्य सफल होगा।

भरत गीते ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में केस स्टडी के रूप में चयन होना कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सीमाओं को पार करते हुए भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का उनका प्रयास अब और मजबूत हुआ है। 2016 में स्थापित टौरल इंडिया आज पुणे के चाकण और अहिल्यानगर के सुपा में दो अत्याधुनिक उत्पादन इकाइयों के साथ तेजी से विकसित हुई है। कंपनी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन से प्रेरित होकर उद्योगों को ग्रामीण भारत से जोड़ने के अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रही है।

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